Additional information
| Weight | 0.225 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 14 × 1.0 cm |
| ISBN | 978-81-986091-6-8 |
| AUTHOR | Dr. Carolyn Keene & Saba Khan (Translator) |
| PAGES | 160 |
Original price was: ₹225.00.₹195.00Current price is: ₹195.00.
रिवर हाइट्स के मशहूर लिलैक इन में एक साधारण सी शाम अचानक एक सनसनीखेज़ घटना में बदल जाती है, जब होटल में खाने को पहुँची दो उम्रदराज़ महिलाओं एक हैंडबैग रहस्यमय ढंग से गायब हो जाता है। उस बैग में रखे होते हैं चालीस हज़ार डॉलर के गहने! एक विरासत, जो नैंसी की करीबी दोस्त एमिली क्रैंडल को मिलने वाली थी।
शुरुआत में मामला आसान लगता है। शक, बयान और ढेर सारे सुराग। अपनी दोस्त की तकलीफ़ को देखकर नैंसी जैसे-जैसे इस सच के करीब पहुँचती है, उसे पता चलता है कि यह चोरी कोई बस मौके पर अंज़ाम दे दिया गया अपराध नहीं था, बल्कि लालच, धोखे और पुराने अपराधों की उलझी हुई कड़ी ही थी।
संदेह हर तरफ था। कभी होटल में उस दिन मौज़ूद मेहमानों पर, कभी किसी पुराने आपराधिक रिकॉर्ड वाले पर, और कभी उन लोगों पर, जिन पर भरोसा किया जा सकता था।
जैसे-जैसे समय बीतता जाता है, एक बेक़सूर उम्रदराज़ महिला पर गिरफ़्तारी की तलवार लटकने लगती है।
नैंसी को सच तक पहुँचने के लिए अपनी समझ, साहस और ज़िद, तीनों की आख़िरी हद तक जाना पड़ता है। सच ढूँढ़ने की उसकी ये ज़िद उसे शहर की अंधेरी गलियों, नदी किनारे के सुनसान इलाकों और जानलेवा हालात तक पहुँचा देती है, जहाँ पहुँचकर एकबारगी तो मौत को ही वो अपना मुक़द्दर समझ बैठती है।
तूफ़ानी रात, उफ़नती नदी का ख़तरनाक सफ़र और मौत के साये के बीच उसकी जद्दोज़हद! सवाल सिर्फ इतना नहीं था कि गहने मिलेंगे या नहीं……अब सवाल यह था कि सच सामने आने तक कौन सुरक्षित बचने वाला था।
क्या नैंसी असली अपराधियों तक पहुँच पाई? या गहने हमेशा के लिए पानी की गहराई में खो गए?
नैंसी ड्रियू की रहस्यमयी दुनिया का चौथा कारनामा–‘अ मिस्ट्री एट लिलैक इन’
| Weight | 0.225 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 14 × 1.0 cm |
| ISBN | 978-81-986091-6-8 |
| AUTHOR | Dr. Carolyn Keene & Saba Khan (Translator) |
| PAGES | 160 |
रिवर हाइट्स के मशहूर लिलैक इन में एक साधारण सी शाम अचानक एक सनसनीखेज़ घटना में बदल जाती है, जब होटल में खाने को पहुँची दो उम्रदराज़ महिलाओं एक हैंडबैग रहस्यमय ढंग से गायब हो जाता है। उस बैग में रखे होते हैं चालीस हज़ार डॉलर के गहने! एक विरासत, जो नैंसी की करीबी दोस्त एमिली क्रैंडल को मिलने वाली थी।
शुरुआत में मामला आसान लगता है। शक, बयान और ढेर सारे सुराग। अपनी दोस्त की तकलीफ़ को देखकर नैंसी जैसे-जैसे इस सच के करीब पहुँचती है, उसे पता चलता है कि यह चोरी कोई बस मौके पर अंज़ाम दे दिया गया अपराध नहीं था, बल्कि लालच, धोखे और पुराने अपराधों की उलझी हुई कड़ी ही थी।
संदेह हर तरफ था। कभी होटल में उस दिन मौज़ूद मेहमानों पर, कभी किसी पुराने आपराधिक रिकॉर्ड वाले पर, और कभी उन लोगों पर, जिन पर भरोसा किया जा सकता था।
जैसे-जैसे समय बीतता जाता है, एक बेक़सूर उम्रदराज़ महिला पर गिरफ़्तारी की तलवार लटकने लगती है।
नैंसी को सच तक पहुँचने के लिए अपनी समझ, साहस और ज़िद, तीनों की आख़िरी हद तक जाना पड़ता है। सच ढूँढ़ने की उसकी ये ज़िद उसे शहर की अंधेरी गलियों, नदी किनारे के सुनसान इलाकों और जानलेवा हालात तक पहुँचा देती है, जहाँ पहुँचकर एकबारगी तो मौत को ही वो अपना मुक़द्दर समझ बैठती है।
तूफ़ानी रात, उफ़नती नदी का ख़तरनाक सफ़र और मौत के साये के बीच उसकी जद्दोज़हद! सवाल सिर्फ इतना नहीं था कि गहने मिलेंगे या नहीं……अब सवाल यह था कि सच सामने आने तक कौन सुरक्षित बचने वाला था।
क्या नैंसी असली अपराधियों तक पहुँच पाई? या गहने हमेशा के लिए पानी की गहराई में खो गए?
नैंसी ड्रियू की रहस्यमयी दुनिया का चौथा कारनामा–‘अ मिस्ट्री एट लिलैक इन’