Additional information
| Weight | 0.225 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 14 × 1.0 cm |
| ISBN | 978-81-977395-5-2 |
| AUTHOR | Dr. SHALABH KUMAR GUPTA |
| PAGES | 122 |
Original price was: ₹225.00.₹135.00Current price is: ₹135.00.
जीवन घटनाओं से ही आगे बढ़ता है और कभी कुछ ऐसा भी घटता है, जो केवल स्मृति भर बनकर नहीं टिकता, लेकिन विस्मरण होकर भी पूरी तरह जाता नहीं। उन्हीं अधूरे अनुभवों, थमी, ठहरी हुई अनुभूतियों, अपनेपन के भावों में पगी हुईं और मन के भीतर के मौन की कविताएँ हैं ‘विस्मृति’।
यह संग्रह उन पलों को स्वर देता है, जो अक्सर हम सबके साथ रहते हैं, पर पहचान भी नहीं माँगते। जहाँ भावनाएँ स्पष्ट नहीं होतीं, अर्थ पूरे नहीं होते, फिर भी भीतर कुछ क्या, बहुत कुछ अटक जाता है।
ये कविताएँ किसी निष्कर्ष तक पहुँचने की बात नहीं करतीं, बल्कि बस उस यात्रा की हैं, जहाँ ‘याद’ और ‘भूल’ एक-दूसरे से अलग नहीं, बल्कि साथ-साथ चलते हैं।
| Weight | 0.225 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 14 × 1.0 cm |
| ISBN | 978-81-977395-5-2 |
| AUTHOR | Dr. SHALABH KUMAR GUPTA |
| PAGES | 122 |
जीवन घटनाओं से ही आगे बढ़ता है और कभी कुछ ऐसा भी घटता है, जो केवल स्मृति भर बनकर नहीं टिकता, लेकिन विस्मरण होकर भी पूरी तरह जाता नहीं। उन्हीं अधूरे अनुभवों, थमी, ठहरी हुई अनुभूतियों, अपनेपन के भावों में पगी हुईं और मन के भीतर के मौन की कविताएँ हैं ‘विस्मृति’।
यह संग्रह उन पलों को स्वर देता है, जो अक्सर हम सबके साथ रहते हैं, पर पहचान भी नहीं माँगते। जहाँ भावनाएँ स्पष्ट नहीं होतीं, अर्थ पूरे नहीं होते, फिर भी भीतर कुछ क्या, बहुत कुछ अटक जाता है।
ये कविताएँ किसी निष्कर्ष तक पहुँचने की बात नहीं करतीं, बल्कि बस उस यात्रा की हैं, जहाँ ‘याद’ और ‘भूल’ एक-दूसरे से अलग नहीं, बल्कि साथ-साथ चलते हैं।